Monday, 21 December 2009

TUMHE KISNE

ग़ज़ल 


तम्हें   किसने   कहा  था , तुम  मुझे  चाहो  बताओ  तो 
जो दम भरते हो चाहत का ,तो फिर उसको निभाओ तो 

दिए  जाते  हो  ये  धमकी ,गया  तो  फिर  न  आऊँगा  
कहाँ   से   आओगे  पहले  मेरी  दुनिया  से   जाओ  तो

मेरी  चाहत भी है  तुमको और अपना घर भी प्यारा है 
निपट लूँगी मैं हर ग़म से , तुम अपना घर बचाओ तो 

तुम्हारे   सच    की   सच्चाई   पे   मैं   क़ुर्बान  हो  जाऊँ
पर अपना सच बयां  करने की तुम हिम्मत जुटाओ तो 

फ़क़त   इन   बद्दुआओं    से  , बुरा   मेरा  कहाँ  होगा 
मुझे   बर्बाद   करने    का   ज़रा   बीड़ा   उठाओ   तो 

दीप्ति मिश्र   

4 comments:

PK Sharma said...

mishra g maar hi dalogi

Anonymous said...

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razzmatazz said...

bahut bahut umdah diptiji..dil ko chu gaya

me said...

Thanks:)