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Monday, 9 September 2013

शब्द नहीं अहसास लिखा है

ग़ज़ल 

शब्द नहीं अहसास लिखा है 
जो था  मेरे  पास, लिखा  है

भला - बुरा अब दुनिया जाने 
मैनें  तो  बिन्दास  लिखा  है 

उनकी  की पांती  पतझर लाई
मैं समझी  मधुमास लिखा है

अश्कों  की   स्याही  से  मैनें
जीव न को परिहास  लिखा है

क्या करने हैं महल - दुमहले
क़िस्मत में संन्यास लिखा है 


 दीप्ति मिश्रा
21.8.2013